Sunday, February 25, 2018

निशान यात्रा



Wednesday, February 21, 2018

आपका इनकम टैक्स अकाउंट होगा ज्यादा सुरक्षित, ई-फाइलिंग में मिलेगी डिजिटल...



इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अपनी रिटर्न फाइल करने वाली वेबसाइट को और सुरक्षित करने जा रहा है। ई-फाइलिंग करने वालों के लिए अब डिपार्टमेंट ने डिजिटल लॉक की सुविधा को शुरू कर दिया है। इसकी जानकारी विभाग ई-मेल के जरिए अपने सभी अकाउंट होल्डर्स को दे रहा है। 

नहीं हो सकेगी सेंधमारी
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कहा है कि ई-फाइलिंग अकाउंट में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा सेंधमारी करना मुश्किल हो जाएगा। इस अकाउंट में टैक्सपेयर्स की पर्सनल फाइनेंस से संबंधित जानकारी भी होती है और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से भी सीधे जुड़ते हैं। डिपार्टमेंट ने डिजिटल लॉक का इस्तेमाल करने के लिए कई तरीकें भी दिए हैं, जिनके जरिए आप अपने अकाउंट को सुरक्षित कर सकते हैं। 

इस तरह से बनाए मजबूत पासवर्ड
डिपार्टमेंट ने डिजिटल लॉक के लिए मजबूत पासवर्ड बनाने का अनुरोध किया है। आप अपने मौजूदा पासवर्ड को मजबूत पासवर्ड में बदल सकते हैं। इसके लिए पासवर्ड में अंग्रेजी का कैपिटल लेटर में अक्षर, एक स्पेशल करेक्टर और एक नंबर होना चाहिए। इसके साथ ही पासवर्ड में कम से कम 8 करेक्टर होने चाहिए। इसका उदाहरण ऐसे समझे Bshgo@5678

Monday, February 19, 2018

कहाँ गलती होती है नेट बैंकिंग में.| सावधान



अगर आप Internet पर search कर रहे हैं कि नेट बैंकिंग कैसे करें (Net banking kaise kare in hindi) तो ये article आपके लिए ही है। Net Banking Information देता ये article नेट बैंकिंग से संबंधित आपके लगभग सभी सवालों के जवाब दे देगा। इसे पढने के बाद भी आपकी जिज्ञासा शांत न हो, तो comment section के जरिये हमें जरूर बताएं। हम सभी सवालों के सही जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे। तो Net Banking Information हासिल करने का अपना सफ़र शुरू करते हैं:
नेट बैंकिंग (Net banking), banking का वो तरीका है, जिसमे आप घर बैठे ही internet के माध्यम से banking कर सकते हैं। आज से कुछ वर्ष पहले तक नेट बैंकिंग की सेवा का लाभ उठाने के लिए आपको बैंक में अलग से एक form भरना पड़ता था। पर आजकल bank account open करने के साथ ही आप उसमे net banking, mobile banking आदि के options पर tick कर सकते हैं। ये सेवा banks की तरफ से बिलकुल free दी जाती है, इसके लिए आपको अलग से कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है। नेट बैंकिंग के माध्यम से आप बैंकिंग का हर वो काम कर सकते हैं, जिसके लिए आपको banks में लाइन लगानी पड़ती है। अगर आपको cash पैसा चाहिए तो माफ़ कीजिए, क्योंकि वो इन्टरनेट बैंकिंग से संभव नहीं है। फिर तो आप ATM या बैंक जाइये, cash तो आपको वहीं से मिल पायेगा। लेकिन इसके अलावा कुछ भी काम है तो Net Banking है न।

Priya Prakash Varrier | प्रिया प्रकाश वर्रिएर



जीवन परिचय
वास्तविक नामप्रिय प्रकाश वर्रिएर
उपनामरिया
व्यवसायअभिनेत्री, गायिका
शारीरिक संरचना
लम्बाईसे० मी०- 163
मी०- 1.63
फीट इन्च- 5' 4”
वजन/भार (लगभग)50 कि० ग्रा०
शारीरिक संरचना (लगभग)32-24-34
आँखों का रंगकाला
बालों का रंगकाला
व्यक्तिगत जीवन
जन्मतिथि28 अक्टूबर 1999
आयु (2017 के अनुसार)18 वर्ष
जन्मस्थानपूनकुन्नम, त्रिशूर, केरल, भारत
राष्ट्रीयताभारतीय
गृहनगरपूनकुन्नम, त्रिशूर, केरल, भारत
स्कूल/विद्यालयज्ञात नहीं
महाविद्यालय/विश्वविद्यालयविमला महाविद्यालय, त्रिशूर, केरल
शैक्षिक योग्यतावाणिज्य स्नातक में अनुसरण
डेब्यूतमिल गीत- Nee vaanam Naan mazhai
परिवार



जीवन परिचय
वास्तविक नामप्रिय प्रकाश वर्रिएर
उपनामरिया
व्यवसायअभिनेत्री, गायिका
शारीरिक संरचना
लम्बाईसे० मी०- 163
मी०- 1.63
फीट इन्च- 5' 4”
वजन/भार (लगभग)50 कि० ग्रा०
शारीरिक संरचना (लगभग)32-24-34
आँखों का रंगकाला
बालों का रंगकाला
व्यक्तिगत जीवन
जन्मतिथि28 अक्टूबर 1999
आयु (2017 के अनुसार)18 वर्ष
जन्मस्थानपूनकुन्नम, त्रिशूर, केरल, भारत
राष्ट्रीयताभारतीय
गृहनगरपूनकुन्नम, त्रिशूर, केरल, भारत
स्कूल/विद्यालयज्ञात नहीं
महाविद्यालय/विश्वविद्यालयविमला महाविद्यालय, त्रिशूर, केरल
शैक्षिक योग्यतावाणिज्य स्नातक में अनुसरण
डेब्यूतमिल गीत- Nee vaanam Naan mazhai
Nee vaanam Naan mazhai
मलयालम फिल्म (अभिनेत्री) - ओरु अदार लव (2018)
ओरु अदार लव
परिवारपिता - प्रकाश वर्रिएर
माता - प्रीथा वर्रिएर
भाई - प्रसिद्द वर्रिएर
प्रिय प्रकाश वर्रिएर अपने भाई के साथ
बहन- ज्ञात नहीं
धर्महिन्दू
जातिअंबलावसी (जो मंदिर के रख-रखाव का ख्याल रखते हैं), गैर-ब्राह्मण समुदाय
शौक/अभिरुचियात्रा करना, नृत्य करना, संगीत सुनना
पसंदीदा चीजें
पसंदीदा अभिनेताशाहरुख़ ख़ान, रणवीर सिंह
पसंदीदा अभिनेत्रीदीपिका पादुकोण
पसंदीदा फिल्म निर्देशकसंजय लीला भंसाली
पसंदीदा गीतचन्ना मेरेया (अरिजीत सिंह)
पसंदीदा क्रिकेटरमहेंद्र सिंह धोनी
प्रेम संबन्ध एवं अन्य जानकारियां
वैवाहिक स्थितिअविवाहित
बॉयफ्रैंड्स एवं अन्य मामलेऋषिकेश साजी
पिता - प्रकाश वर्रिएर
माता - प्रीथा वर्रिएर
भाई - प्रसिद्द वर्रिएर

Pithampur-Kaleshwarnath Mandir Janjgir-Champa | Shiv Mandir




जांजगीर-चांपा जिलान्तर्गत जांजगीर जिला मुख्यालय से 11 कि. मी. और दक्षिण पूर्वी मध्य रेल्वे के चांपा जंक्शन से मात्र 8 कि. मी. की दूरी पर हसदेव नदी के दक्षिणी तट पर पीथमपुर में कालेश्वरनाथ का एक मंदिर है। जांजगीर के कवि श्री तुलाराम गोपाल ने ``िशवरीनारायण और सात देवालय`` में पीथमपुर को पौराणिक नगर माना है। प्रचलित किंवदंति को आधार मानकर उन्होंने लिखा है कि पौराणिक काल में धर्म वंश के राजा अंगराज के दुराचारी पुत्र राजा बेन प्रजा के उग्र संघर्ष में भागते हुए यहां आये और अंत में मारे गए। चूंकि राजा अंगराज बहुत ही सहिष्णु, दयालु और धार्मिक प्रवृत्ति के थे अत: उनके पवित्र वंश की रक्षा करने के लिए उनके दुराचारी पुत्र राजा बेन के मृत शरीर की ऋषि-मुनियों ने इसी स्थान पर मंथन किया। पहले उसकी जांघ से कुरूप बौने पुरूष का जन्म हुआ। बाद में भुजाओं के मंथन से नर-नारी का एक जोड़ा निकला जिन्हें पृथु और अर्चि नाम दिया गया। ऋषि-मुनियों ने पृथु और अर्चि को पति-पत्नी के रूप में मान्यता देकर विदा किया। इधर बौने कुरूप पुरूष महादेव की तपस्या करने लगा। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव उन्हें दर्शन देकर पार्थिव लिंग की स्थापना और पूजा-अर्चना का विधान बताकर अंतध्र्यान हो गये। बौने कुरूप पुरूष ने जिस कालेश्वर पार्थिव लिग की स्थापना कर पूजा-अर्चना करके मुक्ति पायी थी वह काल के गर्त में समाकर अदृश्य हो गया था। वही कालान्तर में हीरासाय तेली को दर्शन देकर उन्हें न केवल पेट रोग से मुक्त किया बल्कि उसके वंशबेल को भी बढ़ाया। श्री तुलसीराम पटेल द्वारा सन 1954 में प्रकािशत श्री कलेश्वर महात्म्य में हीरासाय के वंश का वर्णन हैं-
तेहिके पुत्र पांच हो भयऊ। िशव सेवा में मन चित दियेऊ।। प्रथम पुत्र टिकाराम पाये। बोधसाय भागवत, सखाराम अरु बुद्धू कहाये।। सो िशवसेवा में अति मन दिन्हा। यात्रीगण को िशक्षा दिन्हा।। यही विघि िशक्षा देते आवत। सकल वंश िशवभक्त कहावत।।
कहना न होगा हीरासाय का पूरा वंश िशवभक्त हुआ और मंदिर में प्रथम पूजा का अधिकार पाया। श्री प्यारेलाल गुप्त ने भी `प्राचीन छत्तीसगढ़` में हीरासाय को पीथमपुर के िशव मंदिर में पूजा-अर्चना कर पेट रोग से मुक्त होना बताया हैं। उन्होंंने खरियार (उड़ीसा) के राजा को भी पेट रोग से मुक्त करने के लिए पीथमपुर यात्रा करना बताया हैं। बिलासपर वैभव और बिलासपुर जिला गजेटियर में भी इसका उल्लेख हैं। लेकिन जनश्रुति यह है कि पीथमपुर के कालेश्वरनाथ (अपभ्रंश कलेश्वरनाथ) की फाल्गुन पूर्णिमा को पूजा-अर्चना और अभिषेक करने से वंश की अवश्य वृि़द्ध होती है। खरियार (उड़ीसा) के जिस जमींदार को पेट रोग से मुक्ति पाने के लिए पीथमपुर की यात्रा करना बताया गया है वे वास्तव में अपने वंश की वृिद्ध के लिए यहां आये थे। खरियार के युवराज और उड़ीसा के सुप्रसिद्ध इतिहासकार डॉ॰ जे. पी. सिंहदेव ने मुझे बताया कि उनके दादा राजा वीर विक्रम सिंहदेव ने अपने वंश की वृिद्ध के लिए पीथमपुर गए थे। समय आने पर कालेश्वरनाथ की कृपा से उनके दो पुत्र क्रमश: आरतातनदेव और विजयभैरवदेव तथा दो पुत्री कनक मंजरी देवी और शोभज्ञा मंजरी देवी का जन्म हुआ। वंश वृिद्ध होने पर उन्होंने पीथमपुर में एक मंदिर का निर्माण कराया लेकिन मंदिर में मूर्ति की स्थापना के पूर्व 36 वर्ष की अल्पायु में सन् 1912 में उनका स्वर्गवास हो गया। बाद में मंदिर ट्रस्ट द्वारा उस मंदिर में गौरी (पार्वती) जी की मूर्ति स्थापित करायी गयी।
यहां एक किंवदंति और प्रचलित है जिसके अनुसार एक बार नागा साधु के आशीर्वाद से कुलीन परिवार की एक पुत्रवधू को पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई। इस घटना को जानकर अगले वर्ष अनेक महिलाएं पुत्ररत्न की लालसा लिए यहां आई जिससे नागा साधुओं को बहुत परेशानी हुई और उनकी संख्या धीरे धीरे कम होने लगी। कदाचित् इसी कारण नागा साधुओं की संख्या कम हो गयी है। लेकिन यह सत्य है कि आज भी अनेक दंपत्ति पुत्र कामना लिए यहां आती हैं और मनोकामना पूरी होने पर अगले वर्ष जमीन पर लोट मारते दर्शन करने यहां जाते हैं। पीथमपुर के काल कालेश्वरनाथ की लीला अपरम्पार है। छत्तीसगढ़ के भारतेन्दु कालीन कवि श्री वरणत सिंह चौहान ने `िशवरीनारायण महात्म्य और पंचकोसी यात्रा` नामक पुस्तक में पीथमपुर की महत्ता का बखान किया है :-
हसदो नदी के तीर में, कलेश्वरनाथ भगवान। दर्शन तिनको जो करे, पावही पद निर्वाण।। फाल्गुन मास की पूर्णिमा, होवत तहं स्नान। काशी समान फल पावही, गावत वेद पुराण।। बारह मास के पूर्णिमा, जो कोई कर स्नान। सो जैईहैं बैकुंठ को, कहे वरणत सिंह चौहान।।
पीथमपुर के कालेश्वरनाथ मंदिर की दीवार में लगे िशलालेख के अनुसार श्री जगमाल गांगजी ठेकेदार कच्छ कुम्भारीआ ने इस मंदिर का निर्माण कार्तिक सुदि 2, संवत् 1755 (सन् 1698) को गोकुल धनजी मिस्त्री से कराया था। चांपा के पडित छविनाथ द्विवेदी ने सन् 1897 में संस्कृत में ``कलिश्वर महात्म्य स्त्रोत्रम`` लिखकर प्रकािशत कराया था। इस ग्रंथ में उन्होंने कालेश्वरनाथ का उद्भव चैत्र कृष्ण प्रतिपदा संवत् 1940 (अर्थात सन् 1883 ई.) को होना बताया है। मंदिर निर्माण संवत् 1949 (सन् 1892) में शुरू होकर संवत् 1953 (सन् 1896) में पूरा होने, इसी वर्ष मूर्ति की प्रतिष्ठा हीरासाय तेली के हाथों कराये जाने तथा मेला लगने का उल्लेख है। इसी प्रकार पीथमपुर मठ के महंत स्वामी दयानंद भारती ने भी संस्कृत में ``पीथमपुर के श्री शंकर माहात्म्य`` लिखकर सन् 1953 में प्रकािशत कराया था। 36 “लोक में उन्होंने पीथमपुर के िशवजी को काल कालेश्वर महादेव, पीथमपुर में चांपा के सनातन धर्म संस्कृत पाठशला की शाखा खोले जाने, सन् 1953 में ही तिलभांडेश्वर, काशी से चांदी के पंचमुखी िशवजी की मूर्ति बनवाकर लाने और उसी वर्ष से पीथमपुर के मेले में िशवजी की शोभायात्रा निकलने की बातों का उल्लेख किया है। उन्होंने पीथमपुर में मंदिर की व्यवस्था के लिए एक मठ की स्थापना तथा उसके 50 वर्षों में दस महंतों के नामों का उल्लेख इस माहात्म्य में किया है। इस माहात्म्य को लिखने की प्रेरणा उन्हें पंडित िशवशंकर रचित और सन् 1914 में जबलपुर से प्रकािशत ``पीथमपुर माहात्म्य`` को पढ़कर मिली। जन आकांक्षाओं के अनुरूप उन्होंने महात्म्य को संस्कृत में लिखा। इसके 19 वें “लोक में उन्होंने लिखा है कि वि. सं. 1945, फाल्गुन पूर्णमासी याने होली के दिन से इस शंकर देव स्थान पीथमपुर की ख्याति हुई। इसी प्रकार श्री तुलसीराम पटेल ने पीथमपुर : श्री कलेश्वर महात्म्य में लिखा है कि तीर्थ पुरोहित पंडित काशीप्रसाद पाठक पीथमपुर निवासी के प्रपिता पंडित रामनारायण पाठक ने संवत् 1945 को हीरासाय तेली को िशवलिंग स्थापित कराया था।
तथ्य चाहे जो भी हो, मंदिर अति प्राचीन है और यह मानने में भी कोई हर्ज नहीं है कि जब श्री जगमाल गांगजी ठेकेदार ने संवत् 1755 में मंदिर निर्माण कराया है तो अवश्य मूर्ति की स्थापना उसके पूर्व हो चुकी होगी। ...और किसी मंदिर को ध्वस्त होने के लिए 185 वर्ष का अंतराल पर्याप्त होता है। अत: यह मानने में भी कोई हर्ज नहीं है कि 185 वर्ष बाद उसका पुन: उद्भव संवत् 1940 में हुआ हो और मंदिर का निर्माण कराया गया होगा जिसमें मंदिर के पूर्व में निर्माण कराने वाले िशलालेख को पुन: दीवार में जड़ दिया गया होगा।
पीथमपुर में काल कालेश्वरनाथ मंदिर के निर्माण के साथ ही मेला लगना शुरू हो गया था। प्रारम्भ में यहां का मेला फाल्गुन पूर्णिमा से चैत्र पंचमी तक ही लगता था, आगे चलकर मेले का विस्तार हुआ और इंपीरियल गजेटियर के अनुसार 10 दिन तक मेला लगने लगा। इस मेले में नागा साधु इलाहाबाद, बनारस, हरिद्वार, ऋषिकेष, नासिक, उज्जैन, अमरकंटक और नेपाल आदि अनेक स्थानों से आने लगे। उनकी उपस्थिति मेले को जीवंत बना देती थी। मेले में पंचमी के दिन काल कालेश्वर महादेव के बारात की शोभायात्रा निकाली जाती थी। कदाचित् िशव बारात के इस शोभायात्रा को देखकर ही तुलसी के जन्मांध कवि श्री नरसिंहदास ने उिड़या में िशवायन लिखा। िशवायन के अंत में छत्तीसगढ़ी में िशव बारात की कल्पना को साकार किया है।
इसी प्रकार पीथमपुर का मठ खरौद के समान शैव मठ था। खरौद के मठ के महंत गिरि गोस्वामी थे, उसी प्रकार पीथमपुर के इस शैव मठ के महंत भी गिरि गोस्वामी थे। पीथमपुर के आसपास खोखरा और धारािशव आदि गांवों में गिरि गोस्वामियों का निवास था। खोखरा में गिरि गोस्वामी के िशव मंदिर के अवशेष हैं और धारािशव उनकी मालगुजारी गांव है। इस मठ के पहले महंत श्री शंकर गिरि जी महाराज थे जो चार वर्ष तक इस मठ के महंत थे। उसके बाद श्री पुरूषोत्तम गिरि जी महाराज, श्री सोमवारपुरी जी महाराज, श्री लहरपुरी जी महाराज, श्री काशीपुरी जी महाराज, श्री िशवनारायण गिरि जी महाराज, श्री प्रागपुरि जी महाराज, स्वामी गिरिजानन्द जी महाराज, स्वामी वासुदेवानन्द जी महाराज और स्वामी दयानन्द जी महाराज इस मठ के महंत हुए। मठ के महंत तिलभांडेश्वर मठ काशी से संबंधित थे। स्वामी दयानन्द भारतीे जी को पीथमपुर मठ की व्यवस्था के लिए तिलभांडेश्वर मठ काशी के महंत स्वामी अच्युतानन्द जी महाराज ने 20.02.1953 को भेजा था। स्वामी गिरिजानन्दजी महाराज पीथमपुर मठ के आठवें महंत हुए। उन्होंने ही चांपा को मुख्यालय बनाकर चांपा में एक `सनातन धर्म संस्कृत पाठशाला` की स्थापना सन् 1923 में की थी। इस संस्कृत पाठशाला से अनेक विद्यार्थी पढ़कर उच्च िशक्षा के लिए काशी गये थे। आगे चलकर पीथमपुर में भी इस संस्कृत पाठशाला की एक शाखा खोली गयी थी। हांलाकि पीथमपुर में संस्कृत पाठशाला अधिक वर्षों तक नहीं चल सकी (लेकिन उस काल में संस्कृत में बोलना, लिखना और पढ़ना गर्व की बात थी। उस समय रायगढ़ और िशवरीनारायण में भी संस्कृत पाठशाला थी। अफरीद के पंडित देवीधर दीवान ने संस्कृत भाषा में विशेष रूचि होने के कारण अफरीद में एक संस्कृत ग्रंथालय की स्थापना की थी। आज इस ग्रंथालय में संस्कृत के दुर्लभ ग्रंथों का संग्रह है जिसके संरक्षण की आवश्यकता है। उल्लेखनीय है कि यहां के दीवान परिवार का पीथमपुर से गहरा संबंध रहा है।
सम्प्रति पीथमपुर का मंदिर अच्छी स्थिति में है। समय समय पर चांपा जमींदार द्वारा निर्माण कार्य कराये जाने का उल्लेख िशलालेख में है। रानी साहिबा उपमान कुंवरि द्वारा फर्श में संगमरमर लगवाया गया है। पीथमपुर के आसपास के लोगों द्वारा और क्षेत्रीय समाजों के द्वारा अनेक मंदिरों का निर्माण कराया गया है।

Arti pandey | Mai naari hoon

Friday, January 19, 2018

मकर संक्रन्ति की पुर्व संध्या पर हसदेव गंगा महाआरती सम्पन्न

चाम्पा- चाम्पा सेवा संस्थान द्वारा मकर संक्रान्ति के शुभ अवसर पर  छत्तीसगढ़ राज्य विधान सभा के अध्यक्ष मा. गौरीशंकर शंकर अग्रवाल जी की मुख्य अतिथी,अध्यक्षता नरोत्तम दास महंत मठाधीश डोंगाघाट मंदिर,डॉ चरण दास महंत पूर्व केंद्रीय मंत्री,अम्बेश जांगड़े संसदीय सचिव,खिलावन साहू विधायक सक्ति,केशव चन्द्र विधायक जैजैपुर, राजेश अग्रवाल नपाध्यक्ष,धीरेन्द्र वाजपेयी समाजसेवी,अजय बंसल समाजसेवी की विशिष्ठ उपस्थिति में मकर संक्रान्त की पूर्व संध्या पर हसदेव गंगा महाआरती का आयोजन दिनाँक 13 जनवरी की शाम 5 बजे से तापसी धाम डोंगाघाट मंदिर स्थित हसदेव नदी परिसर में किया गया.विधानसभा अध्यक्ष श्री अग्रवाल जी का सुबह 11:30  बजे साऊथ विहार एक्सप्रेस ट्रेन से चाम्पा नगर आगमन पर रेलवे स्टेशन में जोरदार स्वागत किया गया.12  बजे डोंगाघाट मंदिर सवामनी भंडारा में शामिल होने के पश्चात नारायणी धाम में राणी सती की बनाई जा रही स्थान का अवलोकन किया.शाम 5 बजे से चाम्पा सेवा संस्थान द्वारा चाम्पा नगर सहित पूरे क्षेत्र में 1165 दिन नियमित चलाये गए स्वक्छता अभियान में शामिल जागरूक स्वच्छता प्रेमियों का सम्मान विधानसभा अध्यक्ष व उपस्थित अतिथियों के कर कमलो से किया गया.इस मौके पर भजन संध्या की प्रस्तुति आर्ट ऑफ लिविंग परिवार के द्वारा की गई.शाम 6 बजे हसदेव गंगा महाआरती का आयोजन आमंत्रित अतिथियों एवं नगरवासियों की उपस्थिति में सम्पन्न हुई.हरिद्वार गंगा आरती को संप्पन्न करने में विप्रजनों पदमेश शर्मा,उत्तम दुबे,पवन पाठक,मोहन द्विवेदी,शितल द्विवेदी,अरुण उप्पाध्यय शशांक तिवारी,भूपेंद्र तिवारी,शैलेश शर्मा,लिलेस्वर तिवारी,रविन्द्र धर दीवान,शैलेन्द्र तिवारी द्वारा सम्पन्न कराया गया.संस्थान द्वारा चलाये गए कार्यक्रमो का सम्पूर्ण प्रतिवेदन कार्यक्रम संयोजक पुरुषोत्तम शर्मा द्वारा आभार प्रदर्शन संस्थान अध्यक्ष मनोज मित्तल एवं कार्यक्रम का संचालन महावीर सोनी ने किया
कार्यक्रम को सफल बनाने में विनोद मोदी सीरिया, राम खुबवानी मनोज वीरानी,सिद्धनाथ सोनी,तरुण राठौर,रौनक गुप्ता,कार्तिकेश्वर स्रावर्णकार,राजेन्द्र तिवारी,रामनारायण मोदी,मुकेश बंसल,तरुण राठौर,चंद्रशेखर तिवारी,विजय सलुजा,रवि पांडेय,अमर सुल्तानिया,महिला विंग से अध्यक्ष सरिता सोनी,शैल तिवारी, पूनम देवांगन,धार्वी देवांगन,पदमा शर्मा,मणिमाला शर्मा,रजनी सोनी,भावना वीरानी,नेहा खुबवानी,अन्नपुर्णा सोनी,
आदि नगर के गणमान्य नागरिक सहित सैकड़ो की संख्या में उपस्थित थे।

हसदेव गंगा महाआरती को देख जनसमूह हुवे भावविभोर::
हरिद्वार गंगा आरती के समकक्ष नगर के विप्रजनों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार,शंखनाद आदि से हसदेव गंगा महाआरती का आकर्षक रूप प्रदर्शन हुआ 
.महिलायें अपने घर से लाये दीपक से दीपप्रवज्वलित किये.गंगा आरती  समक्ष आरती को उपस्थित देख  जनसमूह भावविभोर हो उठे.हसदेव नदी पर नाविक द्वारा अपने डोंगा को नौकाविहार का आनंद उपस्थित जनसमूह का आकर्षण का केंद्र बिंदु था।